कलियुग के अंतिम राजा दिव्यसिंह देव

ଦିବ୍ୟ ସିଂହ ଦେବ ନୃପତି ନିଶ୍ଚୟ ଆସିବେ ଫେରି,

କ୍ଷେତ୍ର କୁ ନ ଯାଇ ରହିବେ ଯାଇ ଯେ ଖଣ୍ଡଗିରି।

ଦ୍ୱାପର ଯୁଗ ରେ ଜାଣିଥାଅ ସେ ତ ବେଲାଲସେନ,

କଳି ରେ ଜନମ ହୋଇଣ ପଡ଼ି ଅଛି ବନ୍ଦନ।

ତାଙ୍କ ଠାରେ ପ୍ରଭୁ ଙ୍କ ଲୀଳା ଅନେକ ଅଛି,

ଜାଣିଥାଅ ଏ କଥା ନିଶ୍ଚୟ କହିଲି ବାଛି।

गजपति राजा ठाकुर श्री दिव्यसिंह देव हैं द्वापरयुग के बर्बरीक, संत अरक्षित दास ने अपने मालिका ग्रंथ में बताया

ओडिशा के जाजपुर स्थित ओलाशुणी गुफा में सिद्ध साधना करने वाले, सुप्रसिद्ध महापुरुष, ब्रह्म अवधूत संत अरक्षित दास ने 18वीं शताब्दी में ही अपने मालिका ग्रंथ ‘द्वादश चन्द्रिका’ में भविष्यवाणी कर दी कि कलियुग-अंत में पुरी के राजा का नाम एक बार फिर दिव्यसिंह देव रहेगा। वे अपने क्षेत्र (जगन्नाथपुरी) में न रहकर खंडगिरि (भुवनेश्वर) में निवास करेंगे और वे द्वापर युग के बेलालसेन अथवा बर्बरीक ही होंगे पर उनकी वास्तविकता कोई जान नहीं पायेगा। महापुरुष ने आगे लिखा कि वे महाप्रभु कल्कि संग लीलाएं भी करेंगे।

एक दूसरे मालिका ग्रंथ में महापुरुष अच्युतानंद दास ने यह बताया कि खंडगिरि में ही भगवान कल्कि से उनकी भेंट होगी और आगे वे भारत के शत्रुओं से भीषण युद्ध भी करेंगे।